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शुक्रवार, 15 अक्टूबर 2021

Drugs कांड हाईप्रोफाइल गिरफ्तारियां

कोई 10 एक साल पुरानी घटना है जब डॉन उस वक्त सबसे बडी हिट थी और IPL मे जीत के दौरान वानखेड़े मे MCC अफसरो से बवाल हो चुका था
उसी दौरान बांबे में विदेशों से बढ रही तस्करी को रोकने के लिए तेजतर्राक कस्टम ऑफिसर की नियुक्ति एयरपोर्ट पर की गई, इस ऑफिसर की खास बात यह थी कि आदमी के चाल चेहरे से पहचान लेता था कि यह तस्कर करके सामान ले जा रहा है या नहीं, नतीजा यह निकला कि कुछ ही समय मे मुंबई एयरपोर्ट पर तस्कर लोगों के धरपकड़ में तेजी आई और तस्करी में कमी, अब इस ऑफिसर नाम से तस्करों के रूह कापने लगे थे,
और इसी जश्नुमा माहौल के दौरान एक प्रसिद्ध फिल्म कलाकार सपरिवार विदेशों से शॉपिंग करके पर्सनल जेट से एयरपोर्ट उतरे, जिसे देश दुनिया भर के मीडिया कर्मी और पब्लिक चियर करने के लिए मौजूद थे,
इस जश्न नुमा माहौल के रंग में भंग तब पड़ा जब तेजतर्राक कस्टम ऑफिसर ने इस प्रसिद्ध फिल्म कलाकार को धर लिया और कलाकार के द्वारा विदेशों में शॉपिंग की गई एक्सेस सामानों की लिस्ट बनाके उसकी कस्टम ड्युटी फी भरने को कहा, जिसे कलाकार ने भरने मना करने लगा और उल्टे कस्टम ऑफिसर को अपनी हैसियत पकड़ और पहुंच की धमकी देने लगा,
मामला इस कदर हाई-फाई हो गया कि एयरपोर्ट अधिकारियों को प्रेसर भरे फोन पर फोन आने लगे लेकिन कस्टम ऑफिसरों ने कलाकार को डिटेन कर लिया और डेढ़ लाख रुपए कस्टम फी भरवा लेने के बाद ही छोड़ा,
तब छूट के जाते-जाते कलाकार ने कहा - यह डेढ़ लाख तुम्हें बहुत भारी पड़ेगा कस्टम ऑफिसर,
कस्टम ऑफिसर ने जवाब दिया कि -हमने अपनी ड्युटी की है हमारे लिए सब बराबर है
खैर मामला आया गया हो गया और मीडिया मैंनेज व कलाकार की हनक के नाते उस समय समाचारों की प्रमुख सुर्खियां नहीं बन सका
हां लेकिन एक विशेष घटना हुई उस कस्टम ऑफिसर की एयरपोर्ट ड्यूटी से छुट्टी कर दी गई, लेकिन उसका तबादला तबके एक ना मालूम से विभाग NCB में कर दिया गया,
नोट-NCBI भारत की एक प्रमुख केंद्रीय जांच एजेंसी है जिसका काम नशीले पदार्थों के रोक थाम से संबंधित है
फिर इसके 10 एक साल बाद
2की शाम के हुए हाईप्रोफाईल घटना के बाद यह तय होगया था सबूत इतने पुख्ता है कि छूटना तो दूर जमानत भी सीधे तौर पे नही हो सकती,
इधर वहां के राजनीति से जुडे लोग भी किग खान से जमाने से खार खाये बैठे थे, क्योकि देश के फिल्म निर्माण फिनांस आदि मे प्रभावी दखल है वही वितरण आदि मे अकेले किंग का पच्चीस फिसद से ज्यादा कि हिस्सेदारी तयतमाम है जो कि हिंदी बेल्ट के हिसाब से पचास के उपर बैठता है और वे किसी मिजाजपुर्जोसी नही करते,
जबकि पहले वहां इन नेताओ को मिजाज पुर्सी के बगैर आम वितरक कुछ नही कर पाते थे, सो कुछ नेता पुराना बदला निकालने के लिए जातपात धर्म शराफत का मळाला लगा के मामले को और हाईलाईट कर पब्लिक ट्रायल पर ला दिया,
क्योकि कुछ विदेशी फिल्म पे तो वितरक बचे थे पर वे भी पिछले कुछ सालों खत्म होने के कगार पे आगये रहे क्योकि इसमे किंग कि हिस्सेदारी पचास के आसपास हो सकती है इसे ऐसे समझे कि किंग वेटे को अमेरका मे फिल्म प्रोडक्सन सिखने को भेजा जहां बंदे ने हॉलिवुड के ऐसे नामचीन प्रोड्युसरो डायरेक्टरों से दोस्ती करली थी बिना इसके सलाह के भारत मे फिल्मे आना मुश्किल होना था बस दो साल और चाहिए थे कोरोना और लॉक डाऊन ने थोडा रोडा डाला था कि अब ये कांड,
इक उदाहरण ऐसे कि जंगल मुवी के वॉयस डबींग के लिए हिंदी के नामचीन कलाकारों की आवाजें ली जाती है उसमे भी दर्जनभर ऐसे एक्टर होते है जो कमसे कम हॉलिवुड मे जरूर दोचार मुवी मे काम कर चुके होते है तो ही फाईनलाईज किया जाता है
जबकि वहीं लॉयन मुवी मेॆ ऐसे किसी ऐक्टर से काम नही लिया गया, इस घटना के बाद किग के बढते एंपायर से सब हिले हुए ही थे, सो वहां नेता प्रोड्युसर आदि कोई बडी सहायता को तैयार नही था
अब बस एकही रास्ता था नारकोटीक के अधिकारीयों डराया जाय और सो किग खान अपने बैनर की फिल्म शुटिंग के नाम पे सैकडो के तादात मे बाउंसर व नकली पुलिस वाहन लगा के नारकोटीक दफ्तर को एक हफ्ते से घेरे हुए से बंधंक बना रखा हुआ था मिडीया पत्रकार पुलिस आम पब्लिक के लोग वहीं थे पर किसी हिम्मत तक न हुई किंग के इस कृत्य पे आवाज उठा सके,
तभी बिहार से एक स्वतंत्र पत्रकार नाम
मनिष कश्यप घुमते हुए नरकोटिक्स के दफ्तर पंहुच जाते है वे एक केंद्रीय सरकारी दफ्तर को बंधक बनाये का नजारा देख हैरान रह जाते है मामला सिर उपर तब पंहुचता है जब उनके कैमरामैन के रिकार्डेड क्लिप्स को डिलिट करवाया जाने लगा, फिर मनिष ने बिगडैल हाथी के जैसे सोसल मिडिया पे लाईव आके दफ्तर के डिटेन हुए सारे नजारे दिखाते हुए किगं की इस दादागीरी की पोल ही खोल दिया,
उसके बाद बाकी के लोग भी किंग के इस हरकत के विरोध मे आ खडे हुए, इस खुलासे के बाद ही देश मे व दिल्ली मे पता लगा कि ऐसे हालात हो चुके, इस प्रकरण पे नारकोटिक के एक प्रमुख अधिकारी ने आरोप लगाया कि उन्हे कुछ लोगों ने धमकी दी है और उनका पीछा किया जा रहा है

शुक्रवार, 30 अक्टूबर 2020

Hindu सनातनी उदारवादी युद्ध प्रेमी क्यों है

मुंगेरीया या फरीदबाद कांड के संदर्भ मे 
असल में मामला धृष्टता पुर्वक उदारता स्वतंत्रता और शांतिपूर्ण सहअस्तित्व को नकारने वालों के लिए चेतावनी है 
कांड के प्रयोग का विषय वस्तु यह है कि लोगों मे विचारधारा यह है कि जातियों व क्षेत्रीय व्यवस्था में बंटा हिंदू उदारवादी ही होता है किंतु इस विषय पर लोगो में यह भ्रांति मात्र है, यह उदारता मात्र केवल अन्य समुदायों को शांतिपूर्ण सह अस्तित्व एवं समायोजन के लिए अवसर देने के समय मात्र भर है,
वैसे तो पूरे संसार में सबसे लड़ाकू और अब युद्ध प्रिय जाति केवल भारत में बसती है और भारतीयों में विशेषकर हिंदू या सनातन मूल धर्मावलंबी है क्योंकि समग्र युद्ध को एक आनंद विषय समझा जाता है न कि उन्माद का,
जैसा कि उपोक्त कथन अतिशयोक्ति लगती होगी तो बस इतना समझ लीजिए कहीं आप मारपीट या बवाल हो रहा तो लोग भीड़ लगाकर के तमाशा देखने को जुट जाते हैं व मारपीट करने वाले संबंधित व्यक्तियों का उत्साह वर्धन भी करते हैं यह सब इनकी जींसीए गुणसूत्र में बसा गुंण है, कथित तौर पर देखें तो आजके कुलडूड टाइप के लड़के या पुरातन लोग भी फिल्में अगर देखते हैं तो वही पसंद है वही फिल्में हिट भी होती हैं जिनमें एक्शन मारपीट का तड़का हो
 और इसी को मात्र आधार माने तो सत्य प्रतीत होता है कि यदि हिंदू हिंसा में विश्वास नही करते तो आज अस्तित्व में नही होते, 
प्रधानमंत्री अटल बिहारी बाजपेई एरा के पूर्व सब लोगों को याद होगा कि लोग एक एक इंच खेत के पगडंडी के लिए बर्षो तक खानदानी दुश्मनी खून खराबा करते थे, अटल एरा में विभाजन करने का अर्थ है यह कि उन के आगमन के बाद उन्होंने लोगों को व्यापार निर्माण अभियंत्रण सेवाओं की तरफ लोगो को आकर्षित किया जिससे सनतनी समाज के लोग इन सेवाओं की तरफ आकर्षित होकर के इसमें अपने आप को एडजस्ट करके धनसंपदा सम्मान कमाने की लालसा में जुट गए/
यही हिंसा प्रियता न होने से जाने कितनी सभ्यताएं नगरीकरण जैसे सुमेरियन, मेसोपोटामिया, रोमन आज नष्ट हो गये है क्योकिं उनके अंदर युद्ध प्रियता तो कमोबेस थी लेकिन युद्ध, हिंसा व शांति मे समायोजन की अनुकूलता नही थी।
अतएव हिंदू उदारमना तो कतई नहीं होते है बल्कि हजारों वर्षो के सभ्यतागत विकास में सनातनी समाज ने हर विषय की अनुकूलता सीखी है 
आप संसार का इतिहास उठाकर देख सकते हैं हिंसक समुदाय है तो वह भी नहीं बचा है अहिंसक समुदाय भी नहीं बचा है हिंसक अहिंसक सभी नष्ट होंगे, किंतु जो समुदाय इन दोनों से सामंजस्य बैठा या बना लिया है वही जीवित रहा है, सनातनी समाज ने सामनजस्य कैसे किया क्योकि कि यदि इनके पास बुद्ध है तो स्कंदगुप्त भी है गांधी है तो आजाद और बोस भी हैं 
यदि सनातनी समाज उदारमना होते तो न गंगा बचती न किसी की राख तक बचती,
दुसरी बात यह कि सनातनीयों मे पुनर्जन्म के सिद्धांत की मान्यता,  जिससे युनानी, हूण, मंगोल, तुर्क, मुगल, अंग्रेज आदि सभी के हमले उत्पात सब कुछ झेल गए साथ कठोर प्रतिकार भी किया बाकी संसार तबाह होगया क्योकि सनातनी मानते हैकि आत्मा अमर है तो यह सतत संघर्ष है युद्धघोष है, पुनर्जन्म है तो युद्ध की निरंतरता है
अन्तत: सनातनी समाज ने इनसब को अपने धर्म दर्शन से जोडकर यह सिद्धांत विकसित कर लिया कि कैसे हम प्रकृति व जीव के साथ तारतम्य बनाएं जिससे किसी भी परिवर्तन का सामना कर सकें,,                                                                                        सभ्यतागत विकास में उन सबका उपयोग करना सिखा है जो परिवर्तित हो रहे है। यदि कोई वस्तु सनाती समाज के लिए उपयोगी नहीं है या उनको हानि पहुंचा रही तो उससे पीछा छुड़ाना और उसको पुर्णतया नष्ट करना भी बखूबी जानते हैं 
निश्चित रूप से वर्तमान सनातन समाज व राष्ट्र के लिए संक्रमण काल के जैसे है फिर भी सामंजस्य के नियम का पालन हो रहा है बस शिशुपाल की वह सौवीं गलती तक सनातनी समाज चुप रहेगा,                         
यदि सनातन समाज से कुछ दुनिया को सीखना है तो सामंजस्य अनुकूलता सीखे। शांति, अहिंसा, उदारता सब मात्र सहयोगी तथ्य हैं।
यह राष्ट्र अक्षुण्ण रहे, सनातन धर्म और इस देश की सांस्कृतिक परंपराएं अमर रहें... कामना है

रविवार, 3 मई 2020

करोना महामारी में पड़ोसी देश ने जनता के लिए क्या किया

★ केंद्रीय सरकार ने क्या-क्या किया है इस  लॉकडाउन एपिडेमिक के टाइम में जैसे खजाने का मुहं खोल दिया गया,पूरा सिस्टम सेना पुलिस प्रशासन मदद पहुंचा रहा है,
सबसे पहले सरकार ने गैस, डीजल एवं पेट्रोल के दाम डॉलर के अनुपात में 35 से 40 परसेंट दो चरणों में घटा दिए है जिसके कारण पेट्रोल का मूल्य 75 से ₹80 के बीच में ठहरता है ऐसा करने से खाद्यान्न एवं अन्य आवश्यक बस्तुओं के मूल्य बढ़ने नही पाए,
शगैर पंजीकृत व्यापारियों रोड साइड फूड सेलर, कम दूरी के छोटे वाहन चालकों, प्लंबर इलेक्ट्रिशियन रेहडी वाले आदि जो रोजाना दिहाडी कमाके खाने वाले थे  के घरों का पता करके उनके परिवारों को कई चरणों में 15 दिन से एक महीने तक के राशन दिये गये,
फिर प्रथम चरण में सरकार ने अकुशल श्रमिकों का उनकी वर्किंग प्लेस पर जगह जाकर के उनका पंजीकरण किया और सब को कैश बांटा गया,
दूसरे चरण में सरकार ने सर्विस सेक्टर के लोगों जैसे की होटल डिलीवरी आदि से जुड़े कार्मिकों का पंजीकरण किया है और उनको पैसे दिए है
उपरोक्त सब अहसास नमक योजना के तहत किया गया,  यह सब करने के लिए सरकार ने पीएम केयर फंड बनाया और उसमें कहा गया कि इसमें अगर आप कोई 1 पैसे डालते हैं तो सरकार उसमें उसके चार गुने पैसे डालेगी और लोगों की सहायता करी जाएगी, सॉरी धनराशि ऑडिटेबल होगी, कौन पैसे कहां कहां खर्च किए गए किसको किसको दिए गए सब कुछ एक वेबसाइट पर अपलोड कर दिया जाएगा,
इसके साथ ही सरकारी किचेन में लाखों लोग दोनों टाइम भरपेट खाना दिया जा रहा हैं,
एक डेढ़ महीने के बाद से सरकार ने भी विनिर्माण उत्पादन आदि के क्षेत्रों में कुछ इंस्ट्रक्शंस के साथ कार्य करने की अनुमति भी दे दी है,
उपरोक्त सभी कार्य जिला प्रशासन एवं पांच लाख सैनिकों के सहयोग से मात्र पंद्रह दिनों मे ही कर दिया गया है
इसके साथ ही प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि हमारे देश में स्वास्थ्य सेवाओं की कमी को देखते हुए जनता से अपील है कि वह खुद ही  लॉकडाउन के लिए आगे आए और पालन करें, सोशल डिस्टेंस का ख्याल रखें, हम आपको किसी भी गलतफहमी में नहीं रखना चाहते हैं सच्चाई यह है कि करोना महामारी आज या 6 महीने बाद या हो सकता है सालों तक चल सकता है, क्योंकि इसका कोई शर्तिया इलाज या वैक्सीन अभी तक नहीं आ पाई है सो हमें संयम से काम लेना होगा और सरकार आपकी सहायता के लिए हर वक्त तैयार है
उपरोक्त सेवाएं कर्जे मे डूबे, कटोरा ले दर दर मांगते, सैन्य शासित पाकिस्तान सरकार द्वारा ने अपनी जनता को दी गई हैं
और भारत की मजबूत सरकार ने भी यही सब किया हो सकता है पर किसी को ये नहीं पता कि आखिर ये सब हो कहाँ रहा है, चीजें मिल किसे रही हैं, सारा अनाज वैसे ट्रकों मे लद के जा कहाँ रहा है सरकार लाकडॉउन के लटकते ताले के सिवा और कुछ नहीं दिखा समझा पा रही है अपने देश की जनता को और जैसे लगता है उनके खुद के रहमों करम पर जीने मरने को छोड़ दिया गया है

बुधवार, 22 अप्रैल 2020

The last Mughal and its deth


बादशाह जफर को हिंदू मुसलमान सिख सभी बराबरी से चाहते थे क्योंकि उसने अकबर के बाद गौ हत्या पर पाबंदी लगाई थी, 57 के आजादी की लड़ाई में जफर के मना करने के बाद भी उसके सेनापति ने गजवा ए हिंद का नारा देते हुए हिंदू सिख के खिलाफ भी काफिराना फतवा देते हुए सब को मारने का आदेश दे दिया था
उसके बाद मेजर जनरल हडसन ने आखिरकार दिल्ली पर कब्जा कर लिया और हुमायूं के मकबरे से जफर को गिरफ्तार कर लिया,जफर की सारी संपत्ति हड़प ली गई 1 जोड़ी जूते, छड़ी और 2 जोड़ी कपड़े के साथ कुछ पेंशन और बंगाल के 24 परगना में बने सेंटफोर्ट के बगल के एक जेल में कैद कर रखा गया जो तब चमड़े के व्यापार का सबसे बड़ा केंद्र हुआ करता था
ब्रिटेन में महारानी से आदेश पाकर के एक ब्रिटिश ऑफिसर बादशाह जफर से मिलने आया, जफर की आदत थी जब अगर उनसे कोई मिलने आता था तो कुछ ना कुछ जरूर दिया करते थे
मुलाकात के दौरान अफसर से जफर ने कहा कि मेरे पास आपके स्वागत के लिए कुछ नहीं केवल एक गिलास पानी और सोने के अर्क लगा हुआ पान है,
आप ब्रिटेन की महारानी के प्रतिनिधि के तौर पर हिंदुस्तान के बादशाह से मिलने आये हैं तो मैं अपने सोने व मोतीयों से कढ़ाई की जूतियां को उपहार में देता हूं, अंग्रेज अफसर ने कहा कि आपकी कोई आखरी तमन्ना हो तो उसको कहें पूरी की जाएगी ऐसा महारानी का आदेश है,
बादशाह जफर ने कहा कि मेरी कोई आद औलाद उत्तराधिकारी बचा नहीं है सबको तो आप लोगों ने मार डाला है तो मैं मौत को गले लगा सकूं ऐसा कोई इंतजाम हो तो बताइए ये मेरी आखरी तमन्ना है
अंग्रेज अफसर ने कहा कि यह नहीं हो सकता है आपको किसी भी तरीके से हम मार नहीं सकते हैं बर्तानीया हुकूमत की महारानी का आदेश है
तब बादशाह जफर ने कहा कि आप लोगोंको इल्जाम नहीं लगने दूंगा अगर आप मुझे 24 परगना को घुमा देंगे तो मैं यहां से उठने वाली बदबू से ही मर जाऊंगा और उसके ईनाम के तौर पर मैं अपनी हीरे जड़ीत छड़ी ब्रिटेन की महारानी को उपहार में दूंगा, क्योकि हिंदुस्तान के बादशाह रहने के दौरान मैंने इतना बदबूदार शहर नहीं देखा।
अंग्रेज अफसर शहर घुमाने को सहमत हो गए लेकिन यह तय किया गया कि अगर जफर की मौत हो गयी तो उनको हिंदुस्तान के बजाय बर्मा में दफन किया जाएगा जिस पर बादशाह जफर ने भी हामी भरी और नज्म लिखा
कितना है बदनसीब जफर दफ्न के लिए, दो गज जमीन भी न मिली कू-ए-यार में
24परगना शहर दिनभर घूमने के बाद उसी रात को जफर की मौत हो गई और उनको ले जाकर के बर्मा में दफन कर दिया गया

Shivsena and वाचा ऑणि ठंड बसा,

वाचा ऑणि ठंड बसा, मने पढो देखो और चुपचाप पडे रहो,
वे एक बार किसी काम से मुंबई के अधिकारी का नंबर टेलिफोन डायरेक्टरी ढूंढने लगे तो यह पाया कि सारे बडे पदाधिकारी कर्मचारी सब के सब मलयाली और तमिल लोग है यहां के स्थानियों के हिस्से कोई बडे सरकारी पद नही है तब उन्होंने व्यंग स्वरूप वांचा आणी ठंड बसा शीर्षक नाम से हर विभाग के तमिल अधिकारियों के नामों की सूची छापना शुरू किया जिसका उद्देश्य स्थनियो मे जागरूकता लाना कि उनके हिस्से कुछ नहीं है बाद मे लोग अपमान समझकर के विरोध भी करना शुरू किए तो शीर्षक बदल दिया और वांचा अाणि उठा मने पढ़ो और उठो जब इस शीर्षक से लेख छपने लगा तो स्थानिय युवाओं में जबरदस्त प्रतिक्रिया हुई और लोग समर्थन मे उनके घर पर जुटने लगते थे तमिल अधिकारियों द्वारा अपना रोजगार छिने जाने का उनके मन में घर कर गया था जिसके बाद अपने पिता की सलाह पर उन्होंने 19जून 1966 को शिवसेना नामक दल का गठन किया और पहली जनसभा शिवाजी पार्क में अक्टोबर 1966 शिवाजी पार्क का वह मैदान छोटा पड़ गया इतनी भीड़ किसी भी पॉलिटिकल नेता की रैली में भी कभी नहीं हुई थी जहां पर की एक नया युवा लड़का जो गैर राजनीतिक पृष्ठभूमि से आया और कर दिखाया जिस के चर्चे महाराष्ट्र से लेकर के दिल्ली तक होने लगे थे 

 इसी समय एक और घटना हुई दिल्ली में जिसमें की गौ रक्षा कानून बनाने के लिए जुटे साधुओं पर तत्कालीन प्रधानमंत्री ने गोली चलवा दी थी इन मृतक साधुओं की सहायता के लिए तब शैसवावस्था की शिवसेना व बाला साहेब ने चंदा जुटाकर मुआवजे की घोषणा कर दी, तत्कालीन भारतीय राजनीति में यह एक क्रांतिकारी कदम था जो कि हिंदुत्व की तरफ जाता था किंतु बाला इसके बाद भी सेकुलर बने रहे व मजदूर और क्षेत्रीय विशेषकर मुंबई के राजनीति में ही लगे रहे, लेकिन दिल्ली की निगाह में आ चुके थे और जब भारत में इमरजेंसी लागू की गई तो शिवसेना एकमात्र दल रहा जिसको प्रतिबंधित नहीं किया गया और ना ही दल प्रमुख को जेल बंद होना पडा था, कांग्रेस और शिवसेना का यह अलिखित समझौता 1984 मे इंदिरा गांधी की मृत्यु तक चला, 

शिवसेना के चर्चे देशभर में तो हो रहे थे लेकिन अपने गठन के 10 वर्ष के बाद भी शिवसेना का विस्तार व कैडर पूरी तरह महाराष्ट्र में भी नहीं फैल सका था, किंतु इमरजेंसी के विरोध की लहर में जब मोरारजी देसाई प्रधानमंत्री बने और उनके महाराष्ट्र दौरे के दौरान एक प्रोटेस्ट में कई शिव सेना कार्यकर्ता घायल हुए व मारे गए और साथ में बाला साहब ठाकरे भी बुरी तरह से घायल होकर के मरणासन्न हो गए थे जिसके बाद सिंपैथी लहर ने पूरे महाराष्ट्र में सेना का कैडर तैयार कर दिया किंतु कांग्रेस के रहते पार्टी को संभालना मुश्किल था तब शिवसेना ने1984 में अटलजी के नेतृत्व मे नवगठित राष्ट्रीयदल बीजेपी के साथ गठबंधन कर लिया, तब यह तय हो गया था कि शिवसेना को महाराष्ट्र में रोक पाना मुश्किल है किंतु इंदिरा गांधी की हत्या के बाद उपजे सिंपैथी लहर में सेना भजप गठबंधन को काफी नुकसान उठाना पड़ा, पर सत्ता सुख का नुकसान अगले चुनाव में भी राजीव गांधी की हत्या के बाद उपजे सिंपैथी लहर के कारण उठाना पड़ा, 

इसी बीच राम मंदिर आंदोलन व मुंबई बम हमले के बाद बाल ठाकरे का चरित्र व्यवहार सब कुछ बदल गया वह भगवा चोला पहने लगे और हार्डकोर हिंदुत्व की बातें करने लगे, जिसकी परिणिति में अगले पांच साल बाद शिवसेना भाजपा गठबंधन ने पूर्ण बहुमत के साथ सरकार बना ही लिया, यही वह समय था जब शिवसेना का अगला अध्यक्ष या चेहरा बाल ठाकरे के भतीजे राज ठाकरे को माना जाने लगा था किंतु एक बिल्डर की हत्या के मामले मे राज ठाकरे का नाम आने के बाद सीबीआई जांच की आंच बाल ठाकरे तक पहुंचने को हुई जिससे से नाराज बाल साहब ठाकरे ने शिवसेना छोड़ने का ऐलान कर दिया 
जिसके बाद कार्यकर्ताओं ने उनके आवास मातोश्री के सामने प्रदर्शन करते हुए कहते रहे कि 

हमें सत्ता नहीं साहब चाहिए, 

यही वह शानदार समय था जब उद्धव ठाकरे को पार्टी में एंट्री व पकड बनाने का अवसर दिखा, इसके बाद उद्धव ठाकरे ने पीछे मुड़कर के नहीं देखा जबकि राज ठाकरे और नारायण राणे जैसे कद्दावर नेताओं के पार्टी छोड़कर जाना भी पडा, इन सबके बीच शिवसेना को 80 के दशक से ही नेपथ्य में डालने की कोशिश कांग्रेस व व अन्य बड़े नेताओं यथा शरद पवार द्वारा किया जाना शुरू कर दिया गया था किंतु बाल ठाकरे के व्यक्तित्व के आगे यह सब कार्ययोजनाएं व षड्यंत्र शीथिल पड़ जाते थे क्योंकि शिवसेना के रहते हार्डकोर मराठा वोटर्स का बंटवारा हो जाता है यदि शिवसेना के कमजोर पड़ी तो विचारधारा व कैडर कमजोर होते जाएंगे जिससे समस्त हार्डकोर मराठी वोट एनसीपी और कांग्रेस को मिलने लगेंगे, पर ये वोटर्स अन्य पार्टी की तरफ तब जा सकेगे जब दल का मुखिया जैसे उद्धव ठाकरे मुख्यमंत्री बनते हैं 

हालांकि यह बात वर्मातन सेनाप्रमुख समझते थे इस वजह से उन्होंने एकनाथ शिंदे को सरकार की कमान संभालने को दबाव बनाते रहे, पर भाजपा एवं एनसीपी कांग्रेस कोई नहीं सहमत हुआ और सेना तभी कमजोर होगी जब दल प्रमुख से ही उसके आईडियोलॉजी के विरूद्ध काम करवाए जाएं जिससे कैडर नाराज होगा और शिकायत भी नकर सकेगा, सेना के कमजोरी का प्राथमिक लाभ तो एनसीपी को जरूर होगा किंतु सबसे बडा शेयर भाजपा को मिलने की संभावना है और ये अपने पुराने साथी के विद्रोह के बाद धीमे धीमे बर्बाद होते देखना पसंद करेगी
 वैसे भले ही सेना सहयोग से सत्ता मे किंतु ये उनके लिए संक्रमण काल है सत्ता मे बने रहने को वे अब विवश है सत्ता से हटते ही दल मे जबरदस्त भगदड मचेगी जो सम्हाली न जा सकेगी अत: हर तरह के संझौते कर सत्ता मे बने हुए है

शुक्रवार, 17 अप्रैल 2020

कोरोना एपिडेमिक के पश्चात का विश्व

कोरोना वैश्विक महामारी के पश्चात का समय डार्विन के योग्यतम की उत्तरजीविता के सिद्धांत पर आधारित प्रकरण जैसे होगा, योग्यतम उत्तरजीवी वही होगा जो संघर्ष करेगा।
IMF के अनुसार यूरोजोन व विश्व अर्थव्यवस्था बहुत ही खतरनाक हालत मे जाने वाली है ब्रिटेन यूरो जोन से निकल चुका है और गर ग्रीस यूरो क्षेत्र से बाहर निकल जाता है पूरे ग्रुप के सारे देशों के टूट की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता, क्योकि ग्रीस, स्पेन पुर्तगाल, इटली,जर्मनी की अर्थव्यवस्था संकट में है इन सभी देशों का बजट घाटा 15% से अधिक है जो मान्य यूरो सीमा के 4 गुना से भी ज्यादा है कोरोना क्रॉनिक एपीडेमिक डिजीज के इस संकटकाल के बाद यह घाटा और भी बढ़ने की संभावना है असल में फुटबॉल वर्ल्ड कप और ओलंपिक खेलों की वजह से यूरोप में बहुत अच्छी खासी आर्थीक तबाही देखने को मिली जिसके बाद इन देशों में बेरोजगारी की दर 20% के लगभग होगयी, यह और भी बेतहाशा बढ़ सकती है प्रथम विश्व युद्ध के बाद की डबल डिप रिसेशन से संभावना जैसे है
यदि चीन को छोड़ दिया जाए तो सभी देशों में उत्पादन गिरा है यूरोपीय देशों में पिछले दिनों से ही लोगों के वेतन वृद्धि में रोक लगा दी गई है जिससे कर्मचारियों ने हड़ताल की चेतावनी दे रखी थी किंतु करोना संकट की वजह से हड़ताल टल गई है फिर भी ट्रेड यूनियन के नेताओं का कहना है कि बीते वर्षों में यहां की व्यापारियों ने खूब मुनाफे कमाए हैं और अर्थव्यवस्था को बचाने में योगदान नहीं देना चाहते हैं तो सरकारों का उन पर शिकंजा कसा जाना चाहिए।
तो इस वैश्विक महामारी से निपटने के पश्चात संसार भर के विकसित देशों को अपनी अर्थव्यवस्था को संभालने में लग जायेगें, यह स्पष्ट है कि बेरोजगारी किसी हद तक भले ही ना बढ़ेगी किंतु उन राष्ट्रों के स्थानीय एवं बाहरी लोगों में संघर्ष होना अवश्यंभावी दिख रहा है स्थानीय लोग रोजगार में किसी भी तरह का बंटवारा नहीं चाहेंगे, तो एक प्रकार से सस्ते प्रवासी कामगारो के लिए समस्या खड़ी होती दिख रही है फिर भी प्रवासी तो अपने स्वदेश लौट जाएंगे किंतु शरणार्थियों के लिए विकट स्थिति है योरोपिय देशों मैं आए हाल-फिलहाल मध्य एशियाई शरणार्थियों से स्थानीय विकसित देशों के लोगों का संघर्ष स्पष्ट परिलक्षित हो रहा है,
यह संघर्ष दुनिया भर के सभी देशों में राष्ट्रवादी भावना के उभार का समय होगा, जब यह संघर्ष होगा तो दुनिया भर की सरकारें अपने राष्ट्रवादी विचारधारा के लोगों से कोई तनाव नहीं चाहेगी, भले ही वह लोकतांत्रिक देश हो, किंतु विपक्ष के लोग भी कोई ऐसी बातों का समर्थन नहीं करेंगे जिससे राष्ट्रवादी भावनाओं को कष्ट हो, और इस बात का लाभ लेते हुए सत्ताधारी दल और सरकारें अपने राष्ट्र व प्रदेश में चुनाव कम से कम 10 या 15 साल के लिए या आगामी दो तीन चुनाव टाल देंगे,  इसमें विपक्षी दलों का भी समर्थन प्राप्त होने की संभावना है क्योंकि राष्ट्रवादियों के खिलाफ जाने का साहस शायद ही कोई दल या संगठन कर पाए।
कोरोना के बाद भारत की स्थिति
भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर ने आने वाले दिनों के लिए भारतीय अर्थव्यवस्था का एक अनुमान साझा किया है, हालांकि उन्होंने जो भी बातें बताइए कुछ नयी नहीं रही है विश्व के अन्य अर्थशास्त्रियों, सरकारें एवं बैंकर्स ने भी ऐसा ही व्यक्त किया है
हालांकि भारतीय रिजर्व बैंक ने रेपो दरें ऐतिहासिक रूप से घटाएं हैं हालांकि इसकी एवज में उन्होंने कर्ज मे कुछ राहत देने का फैसला किया है साथ ही कुछ बैंकों को अलग से सहायता देने का भी प्रावधान किया हुआ है फिर भी आने वाले समय में जैसा कि प्रतीत होता है भारतीय अर्थव्यवस्था इतनी आसानी से नहीं उठ खड़ी होने वाली है भारतीय अर्थव्यवस्था का मूल स्तंभ भारतीय कृषि है कृषि आधारित देश होने के कारण भारत की अर्थव्यवस्था ग्रामीणों द्वारा पूर्ण रूप से आत्मनिर्भर होने के कारण संभाल ली जा सकने की स्थिति में होगी यदि सरकारों द्वारा कोई अन्या अन्य कर आरोपित न करके कृषको और ग्रामीणों को भरपूर सहायता करने की योजनाओं को फलीभूत करना चाहिए, दुनिया भर की महानगरीय व्यवस्थाओं कमीयां स्पष्ट हो गयी है उनका पतन देखा जा रहा है केवल वही क्षेत्र सुरक्षित हैं जहां ग्रामीण अर्थव्यवस्था एवं कृषि का उत्तरेष्ठ है


सोमवार, 13 अप्रैल 2020

Covid19 और कुंंभ माघ मेला प्रयाग राज एवं गंगाया जले विषाणु न जन्नयते,

सनातन का मूल- धर्मो रक्षति एवं गंगाया जले विषाणु न जन्नयते,
मठ मंदिर देवालय सब बंद है तो फिर कौन है आपके पीछे खड़ा जो आपको सुरक्षित रखे हुए हैं
तो सनातन संस्कृति में प्रकृति वृक्ष पेड़ पौधे नदी वायु जल पहाड़ आकाश आदि सभी को दृष्य प्रकट देव माना गया है कोई आवश्यक नहीं है कि हमलोग देवालय में ही जाएं और पूजा पाठ अराधना कर देवों को प्रसन्न कर किसी संकट से मुक्ति पा सके, सनातन का फैलाव असीमित अनंत है हर तरीके से आध्यात्मिक संतुष्टि देने वाला है
जैसा कि सबको ज्ञात है कि भारत में प्रयागराज गंगा किनारे कुंभ व माघ मेला का तो आयोजन प्रति वर्ष होता है जहां पर करोड़ों श्रद्धालु आकर के स्नान करके चले जाते हैं यह प्रक्रिया, व्यवस्थापन व मेला तकरीबन कई महीनों तक चलता है और यह मेला प्रतिवर्ष जनवरी के दूसरे पखवाड़े उत्तरार्ध में आरंभ होता है और फरवरी के अंत तक चलता है शिवरात्रि के दिन आखिरी स्नान मान्य है कुल मिलाकर होली के 2 दिन पूर्व तक श्रद्धालुओं का आना जाना लगा रहता है
देश के सनातन धर्मी जो भी प्रयागराज आता है वह श्रद्धानवत होकर के गंगाजल को भी अपने साथ में ले जाता है और कमोबेश कभी भी आए कहीं भी गंगा किनारे चाहे जहां भी उसे गंगा के दर्शन हो वो वहीं से गंगाजल को लेजाकर अपने घर में रखता जरूर
कमोबेश इस वर्ष भी ऐसे ही हालात थे जिसमें जबरदस्त गैदरिंग मानव भीड और अनुमानत: 10 करोड़ के आसपास लोग के माघ मेला का पुण्य लाभ लेकर के गए, जैसा कि आपको जानकर हैरानी होगी तकरीबन 15 से पचास हजार के बीच विदेशी नागरिक भी आते हैं यह देखने के लिए कि कैसे यहां करोडो का क्राउड मैनेजमेंट किया जा रहा है, हालांकि उन विदेशी लोगों के समझ में आता कुछ नहीं है क्योंकि पब्लिक स्वयं मैंनेज होके आस्था के संगम में डुबकी लगाती है, और यह जितने विदेशी नागरिक आए हुए थे ज्यादातर उन्हीं संक्रमित देशों से आए थे जहां क्रोना महामारी के तौर पर लोगों की जान ले रही होती है
भारत मे भी यह वही समय है जब कोविड-19 कोरोना के बारे में WHO समेत सारी दुनिया को मालूम चल रहा होता है जिसे वैश्विक महामारी घोषित कर दिया जाता है और इसी दौरान जनवरी में ही भारत में पहला केस पाया जाता है, भारत सरकार दुनिया भर के देशों से लोगों को एयरलिफ्ट करके ले आ रही होती है इन देशों में फंसे हुए लोग हैं जहां की क्रोना महामारी विकराल रूप से लोगो के प्राण हरण कर रही होती है
 यह एयरलिफ्ट तथा स्वमेव आये नागरिक संख्या 15 लाख के तकरीब में होती है, किंतु सनातन की महिमा देखिए सनातन धर्मीयों की आस्था देखिए कि कुंभ की जबरदस्त गैदरिंग में आके चले गए और किसी को भी करोना छू न सका, यह सनातन धर्म की आस्था मे समर्पण, बल, प्रभाव का प्रत्यक्ष प्रमाण है,  गंगा किनारे बसे प्रयागराज की महिमा भी अनंत है सोए वाले हनुमान जी का प्रभाव भी अतुलनीय है और अंत में एक सूक्ति गंगाया जले विषाणु न जन्नयते, जय गंगा, जय हनुमान

बुधवार, 1 अप्रैल 2020

Corona19 का इलाज भारत के पास है

1999 में दो चीनी किआओ लियांग और वांग जियांगसुई के द्वारा लिखी गई पुस्तक, "अप्रतिबंधित युद्ध: अमेरिका को नष्ट करने के लिए चीन का मास्टर प्लान"
जिसमे लेखक द्वय आज के वायरस संक्रमण जनित परिस्थीति से योरोप को दो महीने व अमेरीका के लिए सौ दिन का लक्ष्य निर्धारित कर रखा, इतने दिन की बंदी मे इनकी अर्थव्यवस्था जमीन सूंघने लगेगी अन्य तथ्य भी किताबों मे मौजूद है।
किंतु रूस और उत्तर कोरिया कोरोना से पूरी तरह से मुक्त हैं? पहले तो वे चीन के कट्टर सहयोगी हैं। उसपे भी यदि रूस के खिलाफ चीन कोई कदम उठाता तो रूस चीन को कहीं का नही छोडता,

जैसे कि यह कहा जा रहाकि बीजिंग में कोई क्यों नहीं मारा गया? केवल वुहान ही क्यों? तो संभावना ये है चीनी सरकार वायरस के एंटी डोड का उपयोग कर रही हैं। वुहान भी अब व्यापार के लिए खुल गया है। अमेरिका और योरोप के सभी देश चीन की योजना के अनुसार आर्थिक रूप से जल्दी ही तबाह होने वाले है। क्योकि चीन अमेरिका को सैन्य रूप से नहीं हरा सकता था

भारत की स्थिति क्या है
भारत ने करोना का इलाज ढूंढ लिया है सम्भवत:, यह सिर्फ अनुमान व्यक्त करने वाली बातें हैं किंतु भरोसे लायक भी है, जैसा कि दुनिया भर में मचे हाहाकार से भारत सरकार घबराई हुई और पैनिक सी नहीं है  निश्चिंतता से व्यवस्था कर रही है तो ऐसे ही प्रतीत होता है कि इनके पास इस महामारी का कदाचित इलाज है
हालांक इस बात का दावा नहीं किया जा सकता कि भारत के पास क्रोना की वैक्सिन है किंतु मेडिकल एसोसिएशन ऑफ इंडिया के पास कोई चिकित्सकीय विधि अवश्य है   यह इसलिए भी संभावित है क्योंकि भारत ने जापानी इंसेफेलाइटिस, जीका, डेंगू, वर्डफ्लू आदि का सफलतापूर्वक इलाज करके अपनी जनता को बचाया है
 भारत में पंद्रह लाख लोग विदेशों से आए हैं जिनमे कि ज्यादातर करो ना से प्रभावित देशों से ही लौटे हैं यह संख्या कम नहीं होती है भारत जैसे देश को इन्फेक्ट कर बर्बाद करने के लिए काफी है  गाहे बगाहे ये लोग छुपे छुपाए सैकडों की संख्या मे पकडे भी जा रहे है लेकिन 8-9 हफ्ते गुजर गए, 1500 के आस-पास कोरोना संक्रमित मीले व लगभग 2 -3दर्जन की मौत हुई,  उसमें भी 80% की मुख्य वजह इनफेक्सन से खुद को छुपाए रखना था
जबकि भारत इजराइल समेत कुछ अन्य देशों को जो कोरोणा से प्रभावित हैं उनको मेडिकल किट और दवाएं सप्लाई कर रहा है जबकि इन देशों में चीन के द्वारा सप्लाई किए हुए किट्स और दवाओं को वापस भेजा जा रहा है बाकी दुनिया का कोई देश इस तरह की मेडिकल सुविधाएं सप्लाई नहीं कर रहा,


इससे प्रमाणित होता है कि भारत के पास जरूर कोई न कोई चिकित्सीय विधि है जबकि लॉकडाउन जैसे नवीन विषय के लिए भारतीय प्रशासनिक अमला प्रशिक्षित नहीं था क्राउड मैनेजमेंट और इस अफरातफरी में लगभग 50% ही यह लोग सफल हो पाए है फिर भी भारत एक तरह से सुरक्षित ही है इन सबके बीच विदेशों में मेडिकल किट्स की सप्लाई पे हम यह कह सकते हैं कि भारतीय प्रधानमंत्री नोबेल प्राइज या योरोप में मसीहा बन अपनी पीठ थप थपाने के लिए ये सब कर रहे है किंतु किंतु हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि इस वजह से चीन के विश्व आर्थिक पटल पे कब्जा करने का प्लान पूरी तरह फेल होता नजर आ रहा है दुनिया का सबसे बड़ा मार्केट भारत चीन से कोई सहायता नहीं ले रहा है

जबकि अमेरिका आदि देश तबाह होके चीन के सामने लगभग सरेंडर कर चुके हैं, ऐसी बौखलाई अवस्था में चीनी भारत को तोड़ने का अतिसय प्रयत्न करेगा या भारत पे आक्रमण करेगा इस प्रकार से अगले वर्ल्ड वार की रूपरेखा निश्चित रूप से तैयार हो रही है अगले दो एक वर्षो में विश्व युद्ध निश्चित है

शनिवार, 7 मार्च 2020

Extras के अमिताभ बच्चन केदारनाथ सहगल

             एक्सट्रस के अमिताभ बच्चन

500 से अधिक फिल्मों किसी भी फ़िल्म में 1 मिनट 2 मिनट के लिए ही नजर आया सामान्य किंतु टू लाइनर जबरदस्त संवाद के साथ जैसे ।
I am sorry,
 पुलिस ने तुम्हे चारों ओर से घेर लिया है,
order order,
अब दवा से ज्यादा दुआ पर भरोसा करो जैसे तमाम कालजयी संवादों के जनक रहे "केदार नाथ सहगल".... नाम से कुछ मालूम चला क्या? चलेगा भी नहीं। क्योंकि कोई इस अभिनेता का नाम नहीं जानता। हाँ... पहचानते सब हैं। पर कभी किसी ने इनकी ओर ध्यान ही नहीं दिया।
केदार साहब एक्स 80-90 के दशक में हर दूसरी फिल्म में नजर आते थे।
शोले जैसी फ़िल्म में टंकी वाले सीन में
"ये सुसैइड क्या होता हैभईया "
जैसा सफल डॉयलॉग इन्ही ने कहा था।


 अमर अकबर एंथोनी, परवरिश, डॉन जैसी तमाम सफल फिल्मों में इनकी भागीदारी रही। जज, वकील, पुलिस इंस्पेक्टर से लेकर किसी गांव वाले या ग्लास पकड़ कर पार्टी में खड़े होने वाले किसी उद्योगपति का किरदार इन्होंने बहुत खूबी से निभाया। माजक नहीं पर ऐसे छोटे किरदारों और मेहनती लोगों की वजह से ही फिल्में सफल होती हैं। केदार साहब ने अपनी इन छोटी छोटी भूमिकाओं से ही पूरा जीवन यापन किया। 1941 में पृथ्वी राजकपूर साहब की सिकंदर फ़िल्म से शुरू हुआ इनका अभिनय 2013 तक इनकी मृत्यु तक चला।
हम अक्सर इनके बारे में सोचते थे की यह कौन हैं जो अक्सर फिल्मों में नजर आते हैं। किंतु मालूम न चल पाता था।
आज इस पोस्ट के माध्यम से न सिर्फ अपने साथ ही केदार साहब को भी अपनी इस पोस्ट के माद्यम से अपने मित्रों तक पहचान करवाना चाहता हूँ। साथ ही धन्यवाद भी 👍👍
सभार- ललित शर्माजी
और जैसे कि लगता सुरेंद्र मिश्रा की कामयाब ऐसे ही किसी कलाकार के जीवन से प्रेरित हो के बनी है

शनिवार, 29 फ़रवरी 2020

HIV AIDS का शर्तिया इलाज

HIV AIDS का शर्तिया इलाज
यह कोई एडरवरटाइज नही है बल्की सच है इस एड्स नामके लाइलाज का स्थाई उपचार एक भारतीय डॉक्टर द्वारा खोजा गया है
डॉक्टर के बजाए वैद्य भी कह सकते है और शायद उन्हे नोबेल वगैरह भी नही मिलेगा
यह संघर्ष की कहानी है बिहार के नालंदा जिले के सोहसराय बरार के सरपंच के बेटे जिन्होने उच्च शिक्षा मे एलोपेथी जैसे क्रीम एजुकेशन को छोड आर्युवेद मे चिकित्सक की डिग्री ली
फिर मैदान मे आ डटें किंतु जब उन्होने देखा कि एलोपेथ से इलाज के बाद भी बीमारियां बार-बार उभर आती हैं, तो उन्होने इन बीमारियों के स्थाई समाधान के लिए आयुर्वेद पर अपना ध्यान केंद्रित किया, तब उन्हे मालुम चलाकि आर्युवेद की पारंपरिक चिकित्सा पद्धति में वर्तमान मे तो कायदे से कोई शोध हुआ ही नहीं है जबकि इसमें कई बीमारियों के स्थाई समाधान की अनंत संभावनाएं हैं तब इसी क्रम मे उन्होने बेहद कम संसाधन के बावजुद राजगीर मे भगवती आर्युवेद के नाम से अपने शोध संस्थान की नीवं डाली और एनिमीया, पाचन व जोड़ों के दर्द जैसी बीमारियां के स्थाई समाधान व शरीर के तीन दोषों-वात, कफ और पित्त को संतुलित करने वाली दवाओं की सफलतम खोज की और मरीजो से सकारात्मक प्रतिक्रिया भी मिली
इसी क्रम मे डॉक्टर साहब मानवी इम्युन सिस्टम को और कारगर बनाने के लिए खोज व शोध मे लग गये जिसमे AIDS पर ही शोध करने की ठानी और इस बीमारी के उन्मूलन और इसका स्थाई प्रभावी इलाज की दृढ़ इच्छा शक्ति ने डॉक्टर साहब को आखिरकार उन्होंने  "कॉन्स्टॉप" के रूप में  आयुर्वेद की यह दवा खोज ही ली, जो न सिर्फ शरीर की रोग प्रतिरक्षा प्रणाली को पुनःस्थापित करती है बल्कि मानव शरीर से एचआईवी के सारे वायरस को मार देती है। इसके कारण एचआईवी का मरीज पूरी तरह सामान्य जीवन जी सकता है।
डॉक्टर कुमार का शोध न सिर्फ सफल हुआ बल्कि इससे उन्हें अपनी सर्वश्रेष्ठ क्षमता से मानवता की सेवा करने का संतोष भी मिला।
इन महान व्यक्ति्व का नाम डॉक्टर अनिल है
जो कि एचआईवी के हर मरीज की पूरी जांच और उनमें वायरल लोड का खुद टेस्ट करते हैं। मरीजों का नियमित फॉलोअप किया जाता है और बीमारी में हर सुधार को दर्ज किया जाता है। डॉक्टर अनिल कई एचआईवी मरीजों का सफल इलाज कर सामान्य जीवन में वापस भेज चुके हैं।


वैसे़आप लोग जिया हो बिहार के लाला कह सकते है

शुक्रवार, 28 फ़रवरी 2020

OYO Rooms -50 रूपये और मात्र चार साल मे मिलेनियर

मात्र 50 रूपया 21 साल का ग्रामिण पृष्ठ भूमि का बेरोजगार युवा एक साधारण कैमरा व इंटरनेट जबकि संपत्ति के नाम का कुछ नही
 और अगले 4 सालों मे ही 25 वर्ष का होते होते दुनिया का सबसे युवा व सबसे तेजी से बनने वाला मिलेनियर जिसने पच्चीस हजार प्रत्यक्ष व पचास लाख के करीब अप्रत्यक्ष लोगो को रोजगार दे रखा हो
राजस्थान रायगढ के किसान परिवार के मिस्टर अग्रवाल पढाई पुरी करने के बाद बेरोजगार थे और कुछ नया करने की सोच रहे थे और इसी क्रम मे एक दिन वे अपने परिचित के यहा मिलने उसके लॉज में गये वह लाखों का इनवेस्ट लॉज मे कर रखा था किंतु उस निवेस के अनुरूप ग्राहक की कमी से जुझ रहा था उसे बिजनेस में लाभ नही हो रहा था जबकि लॉज के प्रचार मे कोई कसर बाकी नही किया हुआ था
मिस्टर अग्रवाल ने  लॉज ओनर से अंदरूनी व्यवस्था व कमरे देखने का निवेदन किया जिसकी सहमती मिलने पर निरिक्षण के बाद लॉज के मालिक से उन्होनो कहा कि आप यदि मेरी बात माने तो लॉज के प्रचार प्रसार के लिए फिर कुछ खर्च करें क्योकि ग्राहको को लॉज के अंदर की व्यवस्था नही मालुम और कोइ यहां आ के आपके लॉज के कमरे व व्यवस्था देखने मे समय नष्ट नही करना चाहेगा सो अंदरूनी व्यवस्था के फोटो ग्राहक के घर होने चाहिए जिसपे खर्च करना होगा किंतु लॉज मालिक अब और खर्च करने के विचार मे नही था तब अग्रवाल ने दुसरा प्रस्ताव रखा यदि यह प्रचार खर्च मै करू और ग्राहक आ के आपके लॉज की सेवाए लेने लगे तो मुझे उससे हुए लाभ मे से भुगतान करना होगा जिसपे लॉज मालिक सहमत हो गया
अग्रवाल ने लॉज के कमरों का व्यवस्थापन साज सज्जा स्वय अपने हाथो करके कुछ फोटोग्राफ अपने कैमरे से ले कर कई सोसल मिडिया के साईटो पर मुल्य व अन्य सेवाओ के डिसक्रिप्सन के साथ लॉज मे रूकने अॉफर किया जिसके परिॅणाम स्वरूप कुछ ही समय में लॉज मे ग्राहको की आमद अचानक बढ गयी और भारत मे यह समय इंटरनेट सस्ते होने के कारण सर्वउपलब्ध था


फिर यही से ग्रामिण पृष्ठ भुमि के रितेश अग्रवाल को OYO होटल्स की प्रेरणा मिली और वे फिर पिछे मुड के नही देखते है
साथ ही भारत मे दम तोडते होटल व्यवसायी व व्यवसाय मे आचानक जबरदस्त उछाल आगया, OYO से जुडे सभी होटल्स ग्राहको की भीड से भरे रहने लगे,
आज भी OYO व Retesh Agrwalके पास किसी एक होटेल का स्वामित्व नही किंतु रितेश के स्वामित्व वाला OYO समुह लाखों होटेल चाला रहा है

बुधवार, 30 अक्टूबर 2019

युद्धप्रिय भारतीय व शांतिपुर्ण सहअस्तित्व

★ India that is भारत
शीशुपाल बैठ जा .......
शांत हो जा शीशुपाल ......
खोल ले अपने सारे घोड़े ......
किंतु.....
यह संवाद आपने महाभारत मे देखा सुना पढा होगा किसके लिए क्यो कहा गया था और वर्तमान में यह संवाद आपने प्रवक्ता संबित पात्रा को कहते हुए सुना होगा किसी चैनल डिबेट में,
असल में मामला धृष्टता पुर्वक उदारता स्वतंत्रता और शांतिपूर्ण सहअस्तित्व को नकारने वालों के लिए चेतावनी है
वस्तुत: विषय वस्तु यह है कि लोगों मे विचारधारा यह है कि जातियों व क्षेत्रीय व्यवस्था में बंटा हिंदू उदारवादी ही होता है किंतु इस विषय पर लोगो में यह भ्रांति मात्र है, यह उदारता मात्र केवल अन्य समुदायों को शांतिपूर्ण सह अस्तित्व एवं समायोजन के लिए अवसर देने के समय मात्र भर है,
वैसे तो पूरे संसार में सबसे लड़ाकू और अब युद्ध प्रिय जाति केवल भारत में बसती है और भारतीयों में विशेषकर हिंदू या सनातन मूल धर्मावलंबी है क्योंकि समग्र युद्ध को एक आनंद विषय समझा जाता है न कि उन्माद का,
जैसा कि उपोक्त कथन अतिशयोक्ति लगती होगी तो बस इतना समझ लीजिए कहीं आप मारपीट या बवाल हो रहा तो लोग भीड़ लगाकर के तमाशा देखने को जुट जाते हैं व मारपीट करने वाले संबंधित व्यक्तियों का उत्साह वर्धन भी करते हैं यह सब इनकी जींसीए गुणसूत्र में बसा गुंण है, कथित तौर पर देखें तो आजके कुलडूड टाइप के लड़के या पुरातन लोग भी फिल्में अगर देखते हैं तो वही पसंद है वही फिल्में हिट भी होती हैं जिनमें एक्शन मारपीट का तड़का हो
 और इसी को मात्र आधार माने तो सत्य प्रतीत होता है कि यदि हिंदू हिंसा में विश्वास नही करते तो आज अस्तित्व में नही होते,
प्रधानमंत्री अटल बिहारी बाजपेई एरा के पूर्व सब लोगों को याद होगा कि लोग एक एक इंच खेत के पगडंडी के लिए बर्षो तक खानदानी दुश्मनी खून खराबा करते थे, अटल एरा में विभाजन करने का अर्थ है यह कि उन के आगमन के बाद उन्होंने लोगों को व्यापार निर्माण अभियंत्रण सेवाओं की तरफ लोगो को आकर्षित किया जिससे सनतनी समाज के लोग इन सेवाओं की तरफ आकर्षित होकर के इसमें अपने आप को एडजस्ट करके धनसंपदा सम्मान कमाने की लालसा में जुट गए/
यही हिंसा प्रियता न होने से जाने कितनी सभ्यताएं नगरीकरण जैसे सुमेरियन, मेसोपोटामिया, रोमन आज नष्ट हो गये है क्योकिं उनके अंदर युद्ध प्रियता तो कमोबेस थी लेकिन युद्ध, हिंसा व शांति मे समायोजन की अनुकूलता नही थी।
अतएव हिंदू उदारमना तो कतई नहीं होते है बल्कि हजारों वर्षो के सभ्यतागत विकास में सनातनी समाज ने हर विषय की अनुकूलता सीखी है
आप संसार का इतिहास उठाकर देख सकते हैं हिंसक समुदाय है तो वह भी नहीं बचा है अहिंसक समुदाय भी नहीं बचा है हिंसक अहिंसक सभी नष्ट होंगे, किंतु जो समुदाय इन दोनों से सामंजस्य बैठा या बना लिया है वही जीवित रहा है, सनातनी समाज ने सामनजस्य कैसे किया क्योकि कि यदि इनके पास बुद्ध है तो स्कंदगुप्त भी है गांधी है तो आजाद और बोस भी हैं
यदि सनातनी समाज उदारमना होते तो न गंगा बचती न किसी की राख तक बचती,
दुसरी बात यह कि सनातनीयों मे पुनर्जन्म के सिद्धांत की मान्यता,  जिससे युनानी, हूण, मंगोल, तुर्क, मुगल, अंग्रेज आदि सभी के हमले उत्पात सब कुछ झेल गए साथ कठोर प्रतिकार भी किया बाकी संसार तबाह होगया क्योकि सनातनी मानते हैकि आत्मा अमर है तो यह सतत संघर्ष है युद्धघोष है, पुनर्जन्म है तो युद्ध की निरंतरता है
अन्तत: सनातनी समाज ने इनसब को अपने धर्म दर्शन से जोडकर यह सिद्धांत विकसित कर लिया कि कैसे हम प्रकृति व जीव के साथ तारतम्य बनाएं जिससे किसी भी परिवर्तन का सामना कर सकें,,                                                                                        सभ्यतागत विकास में उन सबका उपयोग करना सिखा है जो परिवर्तित हो रहे है। यदि कोई वस्तु सनाती समाज के लिए उपयोगी नहीं है या उनको हानि पहुंचा रही तो उससे पीछा छुड़ाना और उसको पुर्णतया नष्ट करना भी बखूबी जानते हैं
निश्चित रूप से वर्तमान सनातन समाज व राष्ट्र के लिए संक्रमण काल के जैसे है फिर भी सामंजस्य के नियम का पालन हो रहा है बस शिशुपाल की वह सौवीं गलती तक सनातनी समाज चुप रहेगा,                       
यदि सनातन समाज से कुछ दुनिया को सीखना है तो सामंजस्य अनुकूलता सीखे। शांति, अहिंसा, उदारता सब मात्र सहयोगी तथ्य हैं।
यह राष्ट्र अक्षुण्ण रहे, सनातन धर्म और इस देश की सांस्कृतिक परंपराएं अमर रहें... कामना है

मंगलवार, 1 अक्टूबर 2019

Imran Ahmad Khan Niyaji Pak Primeminister, UNGA मे भारतीय प्रतिनीधि द्वारा पुरानाम लेने के कारणों का विश्लेषण

जैसा आप सभी लोग जानते है UNGA के राइट ऑफ रिप्लाई में जब पाक PM को Mr. इमरान अहमद खां "नियाजी"कहकर भारत की महिला आईएफएस अधिकारी विदिशा मैत्री ने संबोधित करते हुए इमरान की स्पीच का जवाब देना शुरू किया तो इससे न सिर्फ इमरान बल्कि पूरा पाकिस्तान उबल पडा और जलभुन गया।

आइये जाने नियाजी सरनेम का रहस्य कि क्यों इमरान खान अपने नाम के आगे नियाजी शब्द लगाना पसन्द नहीं करते हैं और इसे छिपाते हैं
वैसे तो पाकिस्तान में नियाजी शब्द एक गाली जैसा है और पाकिस्तान का विपक्ष जब इमरान खान का विरोध कर रहा होता है तो Go नियाजी Go कहकर उन्हें चिढ़ाता है।
असल मे नियाजी सरनेम के तार पाकिस्तान को भारत के हाथों 1971 में मिली तगड़ी हार से जुडे है जिससे पाकिस्तान के घाव हरे हो जाते हैं।

पाकिस्तान के लिए ये शिकस्त बेहद दुखदायी थी क्योंकि 1971 के वार के समय तक पाकीस्तान में जनरल अमीर अबदुल्ला खां नियाजी की छवि एक दहाड़ते शेर  हिरो जैसी थी पाकिस्तानी सोचते थे कि ये आदमी लड़ते लड़ते शहीद जायेगा पर शिकस्त नहीं मानेगा। पर ऐसा कुछ न हुआ उल्टे 1971 की जंग में 90 हज़ार पाकिस्तानी सेना के साथ भारतीय जनरल जगजीत सिंह अरोड़ा के समक्ष आत्मसमर्पण करना पडा और जनरल जगजीत सिंह अरोड़ा ने उनका रिवाल्वर रखवाकर नियाजी का सैनिक बैच नोच लिया था। जनरल अरोड़ा खुद कुर्सी पर वैठे रहे और जनरल अमीर अब्दुल्ला खां नियाजी को पांच घण्टा खड़ा ही रखा गया था। इस आत्मसमर्पण के बाद पाकिस्तान के दो टुकड़े हुए जिसमे एक हिस्सा वर्तमान में आज बांग्लादेश है।

आत्मसमर्पण की शर्मिंदगी लिए कुछ पाकिस्तानी सैनिकों ने तो घर लौटकर आत्महत्या तक कर ली। इस करारी हार की जांच के लिए जनरल अमीर अब्दुल्ला खान नियाजी पर हमीदउर्रहमान आयोग का गठन किया गया था।
तो 1971 वार के हार के जिम्मेदार उन जनरल अमीर अब्दुल्ला खां नियाजी के परिवार या समुदाय से मानते है पाकी लोग वर्तमान पाकी पीएम इमरान खान को। एक लंबे समय तक इमरान के पिता भी नियाजी सरनेम के कारण इसी हार पर कटाक्ष पाकिस्तान की जनता से सुनते रहे है।
हालांकि  जब इमरान क्रिकेट में आये तो क्रिकेट के बादशाह बनकर क्रिकेट पर छा गये। इमरान अपनी कप्तानी में क्रिकेट का वर्ल्डकप भी पाकिस्तान को दिलाया। तो पाकी लोग अमीर अहमद खां नियाजी की शिकस्त और उन पर लगे कलंक को भूल गये। और अंतत: इमरान खान नियाजी पाकिस्तानी आवाम के लिए खुदा बन गये।

अब जब इमरान एक परेशानहाल खास्ताहाल पाकिस्तानी पीएम हैं।राजनीति में असफल व्यक्ति के तौर पर पहचाने जाने लगे हैं तो पाकिस्तानियों के मन में ये आशंका बलवती होती जा रही है कि नियाजी सरनेम ही बेहद मनहूस है। एक नियाजी की वजह से सन 1971 में पाकिस्तान के दो टुकड़े हुए तो दूसरे इमरान नियाजी के पीएम बनते ही भारत अधिकृत कश्मीर में पाकिस्तान का खेल खत्म हुआ और अब अगला नम्बर पाक अधिकृत कश्मीर और बलूचिस्तान का है।
स्रोत अग्यात

बुधवार, 19 जून 2019

IT Cell की कार्यप्रणाली एक सेंट्रल आईडीया

IT सेल की कहानी और कार्यप्रणाली
अमित नाम का एक युवा वेल एजुकेटेड & in इनफार्मेशन टेक्नोलॉजी और पब्लिक रिसर्च में माहिर लड़का अपनी कुछ लोगों की एक रिसर्च टीम के साथ तत्कालीन पार्टी के एक नेता, जो कोर्ट से Tadipaar है जेल गामी, अधेड़  है से मिलता है संयोग से उनका नाम भी अमित ही होता है,
हालांकि इसके पहले वह पार्टी कई और नेताओं से मिला होता है लेकिन उन लोगो को उसकी बात समझ में नही आती है ना भाव देते हैं
घटना वर्ष 2012 गुजरात विधानसभा का आम चुनाव नजदीक था लेकिन यह भी तय था कि इस चुनाव में तत्कालीन सत्तारूढ़ दल हार रही है,जबकि सरकार ने खूब काम किया हुआ था विकास के, हालांकी उसके पुर्व तत्कालीन मुख्यमंत्री दो चुनाव पुर्ण बहुमत से जीत चुके थे जिसमें की एक दंगे की सिंमपैथी व वोट पोलरिजेसन के कारण जीत चुके थे दूसरा जो अपने विकास कार्यों के से जीत चुके थे,
 #15सालों से यह पार्टी राज्य मे सत्तारूढ थी जिससे एंटी इनकंबेंसी भी काम कर रही थी, साथ ही विपक्ष के एक धाकड़ मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार जो पांचवी बार मुख्यमंत्री पद के लिए चुनाव लड़ रहे थे उनके लिए सिंपैथी  चल रही थी कि इस बंदे को भी एक बार अवसर देना ही चाहिए, साथ ही केंद्र में विपक्ष की सत्तारूढ़ सरकार ने अपने सारे रिसोर्सेज लगा दिए थे इस चुनाव को जीतने के लिए, तत्कालीन राज्य की रूलिंग पार्टी चारों तरफ से घिरी हुई थी
सत्तारूढ़ पार्टी की संगठन की अंदरूनी रिपोर्ट और सरकारी एजेंसियां भी यही कह रही थी कि यह चुनाव हम हार रहे हैं,
#तभी अमित नाम का वह युवा लड़का, जिसे अमित नाम के Tadipaar नेता ले आये थे अपनी योजना समझाता है तत्कालीन संगठन पदाधिकारी व मुख्यमंत्री को, और सफल रहता है
#हारे को हरिनाम तो तत्कालीन CM और पार्टी के अन्य पदाधिकारिय उसकी बात मान लेते हैं
अमित नाम का लड़का अपनी टीम लेकर के बैठ जाता है, गुजरात के हर विधानसभा क्षेत्र का पर्सनल लेवल पर विश्लेषण कर और डेटा इकट्ठा किया जाता है,

और यहीं से चुनाव के नियम बदल जाते हैं साथ ही दोनों अमितो की किस्मत भी।भाषण, चुनावी नारे, क्या वायरल करना है हर चीज व पब्लिक डोमेन में क्या नेरेटिव सेट करना है साथ ही उम्मीदवारों की छवि का निर्माण भी।
मैं बस सिर्फ 2 पॉइंट का उल्लेख करूंगा जिसकी वजह से वे चुनाव जीत जाते रहे हैं, क्योंकि सारे पॉइंट्स लिखने में एक मोटी पुस्तक ही तैयार होगी
ट्रिक & फार्मूला -
हर विधानसभा से 4 या 5 उम्मीदवारों की लिस्ट बनाई जाए, चारों उम्मीदवारों की रेटिंग अलग-अलग लोगों से बनाई हो जिसमें कि पहले संगठन कि लेवल पर उम्मीदवार का नामीनेसन और दूसरे में एक स्वतंत्र एजेंसी का हो तीसरे में संगठन का दूसरा उप संगठन हिस्सा जैसे कि छात्र सभा, मजदूर सभा, किसान सभा के द्वारा नामित उम्मीदवार हो।
लेकिन उम्मीदवार के पास कम से कम उसके विधानसभा में उसके 10000  समर्थक वोट होने ही चाहिए, इस बात का कोई मतलब नहीं होगा कि वह अपने दल का है या विरोधी दल का है या किसी पार्टी से आया हुआ है।
आब सभी उम्मीदवारों का पार्टी अध्यक्ष और अन्य लोगों द्वारा इंटरव्यू लिया जाएगा
#डिफरेंट थिंग यह है कि कथित जाति बहुल विधानसभा क्षेत्र से उस जाति के उम्मीदवार को नहीं उतारा जाएगा,
#इंटरव्यू का आखरी क्वेश्चन  उम्मीदवार से कि आप कितने पैसा खर्च कर सकते हो अपने विधानसभा में चुनाव लड़ने के लिए, जो सबसे ज्यादा बोली लगाए कि मैं इतना खर्च करूंगा____और लगभग 80% इन्हीं दोनों आधार पर टिकट बांटे गए,
अब यही से भारतीय चुनाव लड़ने में एक क्रांतिकारी परिवर्तन होता है जैसे कि चुनाव न हो एक गेम है और उसे बाकी सभी उम्मीदवार खिलाड़ी हैं
#हारजीत को भी खेल के जैसे ही लेना है और चुनाव लड़ना भी खेल खेलने के जैसे करना है, IT सेल द्वारा कार्यकर्ताओं के हैवी टारगेट दिए जाते थे जैसे कि इतनी सीटें निकालना है इतने गांव में मोहल्लों में मीटिंग करनी है इतने लोगों से मिलना है
#उम्मीदवार के पैसे के तीन हिस्से होते हैं एक IT सेल के पास एक, दूसरा हिस्सा जिला संगठन के पास और तीसरा हिस्सा पार्टी उम्मीदवार खुद खर्च करेगा,
अब IT सेल यह डिसाइड करेगा कि किस उम्मीदवार को अपने विधानसभा किस क्षेत्र में किस गांव में किस जाति के पास जाकर की क्या बोलना है,
अपने पक्ष के स्टार नेताओं के भाषणों का निर्देश भी IT सेल द्वारा ही किया गया
विपक्षी नेता क्या बोल रहे हैं उनके हर भाषण के एक-एक पॉइंट का विश्लेषण किया गया, और उसमें से वीक पॉइंट निकाला गया
जैसे एक था मौत का सौदागर, शैतान, दुष्ट,
अब IT सेल वालों ने इस पर पलटी मारी है और तत्कालीन मुख्यमंत्री के द्वारा यह कहा जाने लगा कि यह पांच करोड गुजरातियों का अपमान है, मामला ही से पलट जाता है,
#जैसा कि आप लोगों को याद होगा 2014 में विपक्ष के नेता द्वारा नीच राजनीति करने वाला कहा गया,
IT सेल वालों ने भाषण निर्देशन को चेंज किया और यह कहा कि आप यह कहिए कि मुझे नीच कहा गया क्योकि मैं नीच जात का हूं इसलिए,
#खैर 2012 के चुनाव में आप लोगों को याद होगा जैसे कि  तत्कालीन प्रदेश नेतृत्व में अपने सौ से अधिक सिटिंग विधायकों मने कि लगभग सत्तर परसेंट सिटिंग विधायकों का टिकट काट दिया था, लेकिन जब परिणाम आया तो यह अब तक की सबसे बड़ी जीत हुई थी
#दूसरी घटना तब होती है जब वर्ष 2014 में भारत के जनरल इलेक्शन की तैयारियां शुरू हो जाती हैं गुजरात के मुख्यमंत्री की लोकप्रियता अपने चरम पर थी किंतु चुनाव पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन बाबू के नेतृत्व में लड़ा जाने वाला था अतः यह भी तय था कि प्रधानमंत्री भी वही बनेंगे, लेकिन कहते हैं ना बिल्ली के भाग से छींका टूटना और तत्कालीन राष्ट्रीय अध्यक्ष का नाम एक  पूर्त नामक एक घोटाले मे उछाला जाने लगा, सो संगठन के दबाव में मजबूरन तत्कालीन अध्यक्ष को इस्तीफा देना पड़ा और उनके जगह पर एक अन्य पुराने धुरंधर को अध्यक्ष बनाया गया लेकिन इसी शर्त पर कि वह प्रधानमंत्री पद का दावेदार नहीं होगा नए अध्यक्ष इस बात को मान भी जाते हैं और तत्कालीन गुजरात के मुख्यमंत्री को पार्टी की तरफ से प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार पेश कर देते हैं
#फिर दोनों अमित की जुगल जोड़ी तैयार हो जाती है कि यह राष्ट्रीय चुनाव जीतना ही है लेकिन IT सेल वाले अमित ने अपनी कुछ मजबूरियां बताई कि जैसे उनके पास टीम बहुत छोटी है इतने बड़े देश की राष्ट्रीय चुनाव के लिए कैपेबल नहीं है और इतने कम समय में इतनी बड़ी टीम तैयार करना भी मुश्किल काम था सो किसी प्रोफेशनल को हायर किया जाए जिसके पास एक एक बड़ी टीम हो किंतु दिशा निर्देशन हम ही करेंगे
इस काम के लिए प्रशांत कुमार नाम के एक डाटा एनालिसिस  टीम को हायर किया, सहायता ली गई
और फिर 2014 में जो हुआ वह इतिहास है, लेकिन प्रशांत कुमार को उसके बाद कोई पूछने के लिए तक नही आया।
यह एक हाइपोथेटीकल स्टोरी है इसका किसी से कोई लेना देना नहीं है

मंगलवार, 12 फ़रवरी 2019

जिधर तेरी ये नजर है जानेजा मुझे खबर है- कालिया

जिधर तेरी ये नजर है जानेजा मुझे खबर है- कालिया
फिल्म मे बच्चन साब मने कालिया को महारानी का हार उडाना होता है
बहरहाल इस फिल्म को करने के बहुत समय बाद बच्चन साहब को राजनीति का किडा काट खाया और वे इलहाबाद से इंदिरा जी हत्याकांड लहर में लोकप्रिय धाकड नेता बहुगुणाजी के खिलाफ मैदान मे उतर गये
प्रचार में मेयोहाल कचहरी सिवीलाईन पे साइकलें बंटाई लुटाई गयी, फिर भी बहुगुना का क्रेज कम होने का नाम नही ले रहा था
तो देश के चुनावी इतिहास मे ओपेन रोड शो की शुरूआत हुई बच्चान साहब खुले आम सडक पे निकल लिए, आसपास के जिलों समेत इलहाबद की जनता का जन सैलाब महानायक की एक झलक को उमड पडा किंतु इसी रोड शो भीड धक्का मुक्की में किसी ने बच्चन साहब के गले पडा सोने की चेन का कालिया कर गया
बहुत हंगामा हुआ बच्चन साब बहुत नाराज हुए
लोग बाग बताते है कि तत्कालीन पीएमओ तक को हार ढुढने के लिए आना पडा था
खैर इतिहास अपने को दोहराता है इसबार लखनऊ रोड शो मे पुराने कांडों के मद्देनजर काफी एहतियात बरता गया था रोड शो में तकरीबन बीस फुट के हाईट से बस के छत पर नेता गण थे पर किसी शातिर ने प्रदेश प्रभारी महाराजा ज्योतिरादित का पर्स वॉलेट का ही कालिया कर गया ......
वैसे यह सब सुरक्सा मे चूक का मामला है जबकि Z++ सिक्योरटी दी गयी हो उपरोक्त को तो गृहमंत्रालय को संग्यान ले कर उचित कार्यवाही करनी चैये

रविवार, 10 फ़रवरी 2019

Modi never again या Modi Gain Once Again

Modi Gain Once Again या Modi never again
एक व्यंगात्मक समीक्षा
मोदी फिर क्यों या कोई और नया क्यों
क्योंकि ये वो उनके जैसे है
भारत मे इस पद के लिए कमोबेस तुलना के लिए मात्र दो ही मापदंड है नेहरू व इंदिरा, गाहेबगाहे मोदी की तुलना इन दोनो पुर्व प्रधानमंत्रीयों से होती रहती है साथ ही विपक्ष के भी एक नेत्री की तुलना मात्र चेहरे के कारण इंदिरा से होती है कहने का अर्थ है कि एक धारणा स्थापित करने का प्रयास है कि उपरोक्त पुर्व प्रधानमंत्रीयों के जैसा जो होगा वही देश का पीएम बन सकता है 

हालांकि किसी के लिए भी यह तुलना अब के समय मे बेमानी सी है
यदि मोदी की बात करें तो धार्मिक व राजनैतिक दृष्टिकोण से इनकी तुलना सिर्फ पुरातन भारतीय संतों और कुछकुछ अटलजी व सरदार पटेल से हो सकती है।...
इसके पीछे तर्क यह है कि जैसे पुरातन भारतीय संतों ने कभी खुल के धर्म प्रचार नही किया बल्कि उसकी जगह धर्मीक स्थलों के दर्शन प्रवचन व धर्म के विभिन्न अनुष्ठानों क्रियाकलापों से धर्मविमुख जनता को आकर्षित व प्रेरित किया
 दुशरे इनका योगदान ये कि भारत पता नही कैसे उनके रहते भर में बहुत हद तक सांस्कृतिक रूप से एक सूत्र में बंध गया जिस प्रकार सरदार पटेल ने भौगोलिक रूप से भारत को एक सुत्र में किया और इसके साथ ही अटल जी ने जैसे भारत को विपन्न आर्थिक कठिनाईयों से उबारा व देश को सैन्य शक्ति के रूप स्थापित किया वैसे ही प्रधानमंत्री मोदी ने आर्थिक व सामाजिक रुप से भारत को एक किया जैसे GST, रोमिंग फ्री व कॉल रेट आश्चर्यजनक रूप से कम करना, नीति आयोग गठित करना, सर्जीकल स्ट्राइक, कश्मिर मे सेना को खुली छूट, भारत को बाहर से नौसैनिक अड्डे बना के घेरना आदि इस तरह के उन्होंने अनेकानेक ऐसे काम किये जो सैनिक व आर्थिक रूप से भी भारत को एक बनाता है।

बहरहाल मोदी को वोट कौन लोग और क्यो नही देंगे उसका एक मात्र कारण है नोटबन्दी
जिसका सबसे बड़ा नुकसान जिधर मोडीसाहब का ध्यान ही नही गया वो ये कि बडे सरकारी औहदे वाले अफसरो का नोटबन्दी के दौरान अपनी काली कमाई के नोटो को बदलवाने या ठीकाने लगाने के लिए दर दर भटकना पडा जिस घाट कभी न गये रहे उस घाट तक का पानी पीना पडा था किंतु इस बंदी में आम जनता व व्यापारीयों को कतई कोइ नुकसान नही हुआ और दुशरे नोटबंदी के बाद वाले है
 नोटों की आकार व रंग की समस्या ने आम आदमी के मन मे खवामखा डर बढ़ा दिया ..
यदि कोई थोड़े से रुपये भी इकठे कर के गिने तो 500 का नया नोट पुराने 100 के नोट में घुस जाता है ,
 200 वाला बीस के जैसे और ये समझ में ही नही आता कि 100 के आगे लगाए या पीछे
पचास का नया नोट  .. 5 के नोट की फील देता है
हां किंतु100 का नया ब्लू वाला डिफरेंट है तो यूँ लगता है जैसे क्या आपके नंजन पेस्ट मे नमक नींबू अदरक है
और इनसब कठिनाईयों से निजात पाने के बाद यदि भूल से गफलत में पांच देने की जगह पचास दे दिये बीस की जगह दो सौ की नोट व सौ की जगह पांच सौ की नोट तो ऐसे हुए नुकसान वाले तो मोदी के नाम पे कतई भोट नही देने वाले
बाकी देश भर मे लोग वंस अगेन तो रटे ही रहे है जय हिंद कहतेे हुए।

गुरुवार, 4 अक्टूबर 2018

फोर व्हिलर वाहन बनाने मे कुल सत्तर हजार पार्टस का उपयोग होता

शायद आपको मालूम होगा कि एक सामान्य फोर व्हिलर वाहन बनाने मे कुल सत्तर हजार पार्टस का उपयोग होता है एक नट से लेकर हैंडल लाइट तक, मैकेनेकिल इंजिनियर लोगो को मालूम होगा.........
और यह भी मालूम होगा कि विश्वप्रिसद्ध पंम्प, इंजन निर्माता किर्लोसकर ग्रुप के संजय किर्लोसकर के फादर पंम्प निर्माण व्यवसाय मे उतरने के पहले घर घर जा के मसाले बेचा करते थे वो तो महाराष्ट्र मे पानी की कमी ने उन्हे इस काम के तरफ आकर्सित किया............
और यह भी मालूम होगा कि भारत मे आर्मी के लिए जुते तक बनाने की टेक्नोलॉजी नही है...............
मेरे एक सहयोगी मकैनिकल इंजिनियर जो कि उन दिनों पढ रहे थे पुणे मे, हैदराबाद के आर्म डिविजन के तरफ से इन स्टूडेंटस के ग्रुप को एक विजिट के लिए बुलाया गया
.........मैटर यह था कि आप हमारा सहयोग करें
असल मे वहां टैॆक के बारे चर्चा हो रही थी .....
कोई भी आर्मी टैंक हैवी मेटल का बना होता है बॉडी की थिकनेस ऐसी होती है कि कोई भी बुलेट,गोला बम कैसे भी हानि नही पहुंचा सकता........
तो फिर उसके अंदर बैठे सैनिकों की मौत कैसे हो जाती है, क्योकि बमों के विस्फोट के बाद उस जगह पे हैवी वैक्युम व प्रेसर क्रिएट होता है और टैकं उछल पडता है जिससे उसके अंदर बैठे सैनिकों की हड्डीयां टूट के चूर हो जाती है और सैनिक शहीद........
खैर इसी टैक्निकल मसले को लेकर पुणे के मेरे सहयोगी व स्टूडेंट टीम को उन दिनों हैदराबाद बुलाया गया था और स्टूडेटस से कहा गया कि किसी तरह से, किस तकनीकि से टैकं के अंदर बैठे सैनीकों की जान बचाई जा सकती है कि टैंक पर बम गिरने के बाद भी वैक्युम व प्रेसर क्रिएट न हो, और वे इस संबंध मे टेंडर करने जा रहे है स्टूडेंस टैक्निकल प्वाइंट इस संबॆध में साझा करें.......
असल मे बताना यह है कि इसी टेंडर को डालने के लिए भारत की एक बडी कंपनी जिसका नाम आजकल कथित तौर पे एक फाइटर जेट के घोटाले मे नाम उछाला जा रहा, और जो कभी डिफेंस के टेंडर डील नही करती थी उसके बोर्ड ऑफ डॉयरेक्टर ने एक दिन मे डिफेंस कंम्पनी रजिस्टर्ड करा के अपने प्राइवेट चार्टर्ड प्लेन से आके टेॆडर डाल दिया था हालाकि इस कंपनी को यह टेंडर मिला नही पर शुरूआत पंद्रह साल पहले कर दिया था...........
आज भारत मे आर्मी के लिए हैवी व्हीकल केवल टाटा व थापर ग्रुप ही बनाते है जो केवल ज्यादातर ढुलाई के लिए उपयोग मे होता है आर्मड व्हिकल मे भारत की कोई कंपनी अभी तक तो नही थी लेकिन भारत समेत दुनिया भर मे आर्मी के लिए साजो सामान युद्धक मशिनरी का बडा व क्रीम व भयंकर मुनाफेदार बाजार है जिसे देखते हुए अब भारतीय उधोगपति भी समझने लगे है और इस बिजनेस मे उतर पडे है
वैसे एक बात जान लिजीए कि भारतीय सैनिकों के लिए अंतराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप जुते बनाने वाली फैक्ट्री कानपुर मे खुल चुकी है और टेंडर भी मीला है सेना के तरफ से........,
सम्भवतह भारत की कंपनीयां अगले पांचएक सालों मे दुनिया के आर्म बेस कंपनीयों को टक्कर देने लगेगी.......

गुरुवार, 26 जुलाई 2018

Pakistan General Election पाकिस्तान के आम चुनाव और भविष्य का संभावित पाकिस्तान

रूझभेल्ट पूर्व अमेरिकी प्रेसीडेंट ने विश्वयुद्ध के समय कहा था कि- हिंद महासागर पर जिस देश का आधिपत्य होगा वही सही मायने मे विश्व की महा शक्ति होगा...........
सो भारत तीन ओर से हिन्द महासागर से घिरा हुआ है साथ ही दो छोटे समुद्र व खाडीयां भी भारत लगी हुई है और भारतीय नौसेना का इन सभी पे बेपनाह हुकुमत जलजला कायम है
पहले तो भारत पर अंग्रेजी शासन के कारण दो सौ वर्षों तक इस समुद्री इलाके पर कब्जा होने से अंग्रेजो को दुनिया का दादा बनाये रखा................................. इससे रूझवेल्ट का कथन सही सिद्ध होता है लेकिन अंग्रेजो के जाने के बाद अमेरीका व चीन ने हिन्द महासागर को कब्जीयाने अखण्ड कोशिस मे आजतक लगे पडे है लेकिन कोई कायदे का ठिकाना न ढुँढ सके आजतक
और भारत है के स्वतंत्रता के बाद भी इस इलाके मे किसी की दाल नही गलने दी है
खैर मामला पाकिस्तान के पांच टुकड़े होने पर क्यो क्या कैसे किसके फायदे के लिए होगा क्योकि दुनिया के सभी देशों के लिए भारत ने पांच पाकिस्तान का बड़ा सा मोटा सा रंगीन लाभदायक लालीपॉपी अॉफर दिखा दिया है
.....तो इसमें भारत बलुचो के साथ होगा मुख्य वजह भारत ईरान तेल पाइप लाइन,ग्वादर व चीनी सिपेक रोकना है और पीओके तो है ही भारत का
.....................रूस व चीन सिंध पर नजर गडाए है कारण हिन्द महासागर मे सिधी इंट्री जिसमे की चीन ने बिशालकाय सडक परियोजना सिपेक बनाना आरम्भ कर चुका है पर मोदी के आने के बाद भारत के कडे विरोध से यह समय से पुरी न हो सकी और अब इस परियोजना का कॉस्ट रेट पाकीस्तान को कंगाल करने के दरवाजे पे पंहुचा चुकी है सो रूस इसी वजह से संयुक्त सैन्य अभ्यास कर पाक मे जड़ जमाने के फिराक मे है और भारत रूस का तनिक भी विरोध नहीं कर रहा है यह समझे क्यों, जो चीनी ड्रेगन पूरे पाक अकेले को निगलने वाला था अपने हिस्से कुछ न मिलता देख छाती पीट रहा है
..............पंजाब पर अमेरिका व EU की नजर है सेंट्रल एशिया मे अमेरिका व नाटो कंट्री के पास कोई सुरक्षित ठौर नही है जहां से वह भारत चीन इरान समेत मध्य एशिया पर नजर रख सके.......
और पखतुनीस्तान का अफगानिस्तान मे मिलना तय है
..............बाकी जो हिस्सा बचेगा वो इरान के काम आयेगा ईरान चुप चाप तमासा देख रहा है क्योंकि इस बँटवारा कांड में बीना मेहनत के कुछ न कुछ उसे हर हाल मे मिलने ही है
पहले आओ पहले पाओ के आधार पर बँटवारा होगा और रूस चीन पहले आ चुके हैऔर रूस इसबार आफगान वाली गलती नही करेगा,
युरोपियन यूनियन ने भी कचाइन शुरू कर दिया है
अमेरिका भी घुसने को बेकरार और पहले ही पंजाब पर अंगुली रख दिया है कि यदि ये इलाका मेरा नही तो कोऊ इकोनोमिकल सपोर्ट न दूंगा न किसी को देने दूंगा।
इस फिल्म की लंबाई एक साढ़े एक साल मे संभवतह पुरी होगी प्रोमो 2017 से अभी तक चल रहा है अभी तो रिलीज की शुरूआत का साल है ।
दुनिया भर में भारत ही एक ऐसा देश है जो किसी भी तरह से छोटे छोटे राज्यों के शासन प्रशासन को उचित मानता है
और समय समय पर भारत सरकार बडे राज्यों का विभाजन कर नये राज्य बना देता है
हालाँकि सभी नवगठित छोटे राज्य अलग होने के बाद जबरदस्त विकास किये
इसे देख दुनिया के सभी बडे मुल्क आश्चर्यचकित है और लगभग सभी अपने देश मे ऐसी ही निति का निर्माण कर कर रहे है
लेकिन असल मामला है
पाकिस्तान का -अगर पाकिस्तान के पांच टुकड़े होते हैं तब सबको मानसिक खुशी होगी आप लोग क्या सोचते है पाक नही जानता पाक सेना क्या कर रही है
सो कथित लोकतांत्रिक पाक को बचाने का सेना के पास बस एक ही तरीका था अंदर से कट्टर धार्मीक पाक ही विभाजन रोक सकता और बाहर से माडर्न दिखने व रहनुमाई करने वाला चेहरा बिठाना सो इमरान खान से बढीया थोबडा कौन हो सकता था, पर अबतक जिन मुल्कों ने कट्टरता आपनाऊ है वे कुछ वर्षों मे तबाह हो गये हैं
 लेकिन पाक के सबसे बडे सूबे पंजाब के आवाम के साथ खुद 80%पंजाबी अफसरो वाली पाक आर्मी का इमरान के सपोर्ट मे खडा होना धोका लग रहा है जहां कि नवाज व भाई शाहबाज शरीफ की लोकप्रीयता का कोई जोड ही नही फिर इतनी कम सीट कैसे जब बेनजीर मरी थी तो उस सिंपैथी मे भी पीएमएलएन की ऐसी हालत न हुई।
वैसे जब सब अलग होगें तो जैसे सिंध मुल्तान पंजाब बलूच बाटील पेशावरी पख्तून अपने अपने कल्चर के हिसाब से अपना डेवलपमेंट करेंगे यह तय है
वैसे भी दुनिया के सारे देशों के इन नये देशों मे इनवेस्ट के लिए अलग अलग स्वार्थ होंगे और निवेश भी विकास के लिए ही होंगे या किसी और मकसद से यह दिखने लगा है।
परंतु इस्लामिक देशों व उनके संगठन में देशों की संख्या का इजाफा होगा ही।
बाकी भारत के लिए गरीब दोस्त या पड़ोस में गरीब दुश्मनों का इजाफा भी तो तय ही है।

बुधवार, 13 जून 2018

मोदी के बाद भारत काअगला प्रधानमंत्री कौन

विकल्प और शेहला की बात
आजकल विकल्प की बात हो रही है जिसमें देश के  नेतृत्व के विकल्प की बात हो रही है कि देश का नेतृत्व किसके हाथों में सौंपा जाए जो इस वर्तमान नेतृत्व से भी अच्छा और प्रशासनिक रूप से कर्मठ हो
......तो विकल्प हमेशा रहता है
विकल्प या तो तात्कालिक नेतृत्व से अत्यधिक योग्य एवं प्रभावी होता है अथवा अयोग्य होता है
वर्तमान भारतीय लोकतांत्रिक राज व्यवस्था में विकल्पहीनता का जोर शोर से प्रचार किया जा रहा है जब हमारे पास विकल्प नहीं रह गया इस कारण चलो नोटा को वोट देते हैं..................
............किंतु जहां तक मैं देखता हूं कि वर्तमान मोदी जी के नेतृत्व के विकल्प के तौर पर एक बहुत ही बड़ा और कर्मठ नाम आता है वह है सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी
...............वह अकेले इतना सक्षम है जिसमें कि मोदी जी का अमित शाह को और पीयूष गोयल को और जेटली की कमी एक साथ पूरी करते हैं
.................वह पूर्व में भाजपा अध्यक्ष रह चुके हैं जबकि मोदी जी संगठन मे इतने पडे पद पे कभी नही रहे..................और संगठन में उनकी अच्छी खासी पकड़ व लोकप्रियता है जिसमें से मुख्य रूप से महाराष्ट्र एवं समस्त हिंदी भाषी राज्य मे जबरदस्त पैठ है
हालांकि मोदी जी भी हिंदी भाषी राज्यों में मसलन मध्य प्रदेश हिमाचल हरीयाना वगैरह में काफी कार्य किए हुए हैं
..............किंतु उत्तर प्रदेश और बिहार के लिए उनको जो अमित शाह की नियुक्ति करनी पड़ती है जबकि गडकरी अमित शाह जैसे ही इन राज्यों में सक्षम है और कार्यकर्ता मोदी जी जैसे उनका विरोध भी नही करने का साहस करते।
...........लुटियंस मीडिया जिसकी कार्यकलापों को नियंत्रित करने के लिए मोदी जी को जेटली जी का सहारा लेना पड़ता है .............वहीं गडकरी अपने अध्यक्ष रहने के दौरान इन सबको साध रखे थे और कमोबेश आज भी उनका प्रभाव इन मीडिया पर है
मंत्रालय प्रबंधन एवं समय से कार्य पूर्ण करने के मामले में यह कहीं भी पीयूष गोयल से भी दो कदम आगे साबित होते हैं
.............व्यक्तिगत धन-संपदा में भी यह सर्वाधिक धनिक मंत्रियों में से है इनको अपनी व्यक्तिगत छवि निर्माण के लिए पार्टी अथवा किसी अन्य पीआर एजेंसी की आवश्यकता नहीं पड़ती है
.........अंतरराष्ट्रीय मामलों में भी यह बेहद ही कठोर अनुशासित एवं कूटनीतिज्ञ है आप लोगों को याद होगा जब चुनाव की मतगणना 2014 के समय में जब पाकिस्तान के विदेश सचिव विदेश मंत्री से इनका वार्तालाप एक टीवी डिबेट के माध्यम से हो रहा था............................ तब उन्होंने ही कहा था कि अब भाजपा की सरकार है मनमोहन सिंह की सरकार नहीं है आपको उचित जवाब दिया जाएगा यदि शांति से चाहेगे तो शांति के वातावरण का वार्तालाप होगा।
.......दिए गये कार्यो को समय पुर्व खत्म भी कर देते है
...........शायद पुर्ती ग्रुप कांड मे नाम न आता तो संभवतह वह भाजपा उन्ही के अध्यक्षता मे चुनाव लडा होता और मोदी जी से पहले वही पीएम होते।
शेहला ने विकल्प बता दिया है एक और कडक प्रसासनिक व्यक्ति है पार्टी में जो पीएम पद के लायक है

रविवार, 18 फ़रवरी 2018

नरेन्द्र भाई और सोनी जी एक व्यंग्य कथनांक

घटनांक- सोनी पीएम नरेनदर  से थोड़ी दूर ''संसद कैंटीन'' में बैठी थी . 
तभी वहां उनके जमाने का उनका ''पुराना भीट्ट मंत्री '' चीडूबरम आ गया !
लेकिन नरेनदर को देख सकपकाया
लेकिन सोनी ने कडक के पूछा-- क्या आप '' निरव माल्या'' की बुक Fly to London लाये हो ?

चीडूबरम ने डर के कहा -- नहीं मैं तो ' कार्ती चिडूबरम''' की Now where should i go किताब लेने आया हूँ !

सोनी -- नहीं मेरे पास तो '' सुबरामणयम'' की How Held in Herold है

चीडूबरम रूंआसे हो बोले -- ठीक है तब तुम आते समय '' रोबरेट भादरा'' की call u when we jail लेती आना !

सोनी -- ok लेकिन तब मैं '' सिब्बल और सिँधवी '' की Bail in zero loss by making Judge in Hi court जरूर लेती आउंगी !

चीडूबरम मुँह लटका नरेन भाई को नमस्कार करके चला जाता है ! जो दोनों की बातें बड़ी देर से सुन रहे थे।

फिर नरेनदर भाई बोले सोनी जी से -- राजमाटा  ये लड़का इतनी ''ढ़ेर सारी'' किताबे पढ़ कैसे लेता है ? मुझे तो इतनी अंग्रेजी नही आती।

सोनी -- जी ये हमारी टीम का सबसे समझदार और intelligent लड़का है !

नरेन भाई -- तो मैडम इसको कहना एक बार ''मोहन भगत'' की 👉🏿न खाऊगा न खाने दूंगा
जिस ने खाया उसे पचाने भी न दूंगा👈
हिंदी मे है ये भी पढ़ ले ! .....

😂🤣😂🤣